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तुलसी स्मारक/ अयोध्या शोध संस्थान, अयोध्या जी

अयोध्या में 7000 से अधिक मन्दिर हैं, इन मन्दिरों के आलावा भी यहाँ कई दर्शनीय स्थान हैं. जो कि पर्यटन के द्रष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं. पावन सरयू नदी के किनारे बने तटों का दृश्य सुबह शाम देखने लायक होता है. सायं सूर्य अस्त के बाद नित्य होने वाली सरयू माँ की आरती का विशेष महत्व है. समय समय पर होने वाली राम लीला, राम सीता बरात, झूलोत्सव आदि विशेष अवसरों पर यहाँ की सजावट दर्शनीय है.

तुलसी स्मारक भवन, अयोध्या जी/ तुलसी चौरा  :

तुलसी स्मारक भवन की स्थापना 1969 हुयी थी. ऐसा माना जाता है कि संत तुलसीदास ने इसी स्थान पर बैठकर रामायण को रचा था. इस स्मारक में अयोध्या शोध संस्थान भी अवस्थित है. यहाँ एक बड़ी सी लाइब्रेरी है. इसके अलावा यहाँ प्रभु श्री राम, गोस्वामी तुलसीदास और रामायण से जुड़े तथ्यों, लिपियों एवं कलाकृतियों को संगृहीत किया गया है. इस भवन में प्रतिदिन रामलीला का मंचन होता है.

अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संह्रालय, अयोध्या जी :

अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संह्रालय सरयू नदी के तट पर बना हुआ है. यह उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा संचालित है. यहाँ राम से सम्बंधित देश विदेश में पायी गयीं प्राचीन एवं आधुनिक कलाकृतियों एवं अन्य कलाओं का संग्रह है. गुमनामी बाबा, जिन्हें उनके जानने वाले नेता जी सुभाष चन्द्र बोस मानते हैं, का संह्रालय है.

फ़ैज़ाबाद

फैजाबाद का इतिहास अत्यन्त गौरवपूर्ण एवं समृद्ध है। यह प्रभु श्रीराम की जन्म एवं कर्मस्थली है। प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या फैजाबाद जनपद में है। राम-भरत मिलाप के पश्चात भरत खड़ाऊँ लेकर फैजाबाद मुख्यालय से 15 किमी॰ दक्षिण स्थित भरतकुण्ड नामक स्थान पर चौदह वर्ष तक रहे। यहाँ पतित पावनी माँ सरयू नदी रूप में अवतरित होकर सदियोँ से मानव कल्याण करती है। फ़ैज़ाबाद की स्थापना अवध के पहले नबाव सादत अली ख़ाँ ने 1730 में की थी और उन्होंने इसे अपनी राजधानी बनाया, लेकिन वह यहाँ बहुत कम समय व्यतीत कर पाए। तीसरे नवाब शुजाउद्दौला यहाँ रहते थे और उन्होंने नदी के तट 1764 में एक दुर्ग का निर्माण करवाया था; उनका और उनकी बेगम का मक़बरा इसी शहर में स्थित है। 1775 में अवध की राजधानी को लखनऊ ले जाया गया। 19वीं शताब्दी में फ़ैज़ाबाद का पतन हो गया।

गुप्तार घाट :

गुप्तार घाट फैजाबाद में स्थित है, इस घाट को बहुत पवित्र माना जाता है, ऐसी मान्यता है कि भगवान श्री राम ने दोनों भाइयों लक्ष्मण व भरत के साथ, धरती लोक छोड़ने के लिए यहीं जल समाधि ली थी, और परम लोक चले गए थे. 19 वीं सदी में रजा दर्शन सिंह द्वारा इसका नवनिर्माण करवाया गया था. घाट पर राम जानकी मंदिर, पुराने चरण पादुका मन्दिर, नरसिंह मन्दिर और हनुमान मन्दिर स्थित है. यहाँ हर पावन स्नान पर दूर दूर से यहाँ स्नान करने आते हैं.

नन्दी ग्राम :

नन्दी ग्राम अयोध्या से करीब 23 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. इसे भारत कुण्ड के नाम से भी जाना जाता है. ऐसी मान्यता है कि प्रभु श्री राम के वनवास जाने के बाद से ही उनके भाई भरत ने यहाँ तपस्या की थी. साथ ही साथ राम की खडाऊं रख के यहीं से अयोध्या पर 14 बरस राज किया था. एक और मान्यता है अयोध्या के महाराजा दशरथ का पहला श्राद हुआ था. तब से यह श्राद्ध के लिए प्रथम स्थान बन गया. इसलिए श्राद्ध के दिनों में यहाँ विशेष भीड़ होती है.

गुलाब बाड़ी / शुजा-उद-दौला का मकबरा :

गुलाब बाड़ी फैजाबाद में स्थित है यह अवध . गुलाब बाड़ी शहर के सबसे सुंदर बगीचों में से एक है. एक बड़े भू-भाग में फैले इस स्थल की हरियाली लोगों को सम्मोहित करती है. अवध के तीसरे नवाब शुजा-उद-दौला और उनके परिजनों की यहां मकबरा बना हुआ है. यहां शानदार मकबरा है, जिसका गुंबद विशालकाय है और जो विशाल दीवारों से घिरा हुआ है. अंदर जाने के लिए यहां दो विशालकाय प्रवेश द्वार हैं. 8वीं सदी में इस बगीचे में रंगीन गुलाब की विभिन्न किस्मों को लगाया गया था.

 बहू बेगम का मकबरा :

बहु बेगम का मकबरा फैजाबाद के फतेहगंज नाका मार्ग पर स्थित है. यह  मकबरा नवाब शुजाउद्दौला की  प्रिय पत्नी का बहु बेगम का है . मकबरा मुगल स्थापत्य कला का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है. इतिहास गवाह है कि सन् 1816 में इस मकबरे को ताजमहल की भव्यता के साथ बनाने का प्रयास किया गया. अँधेरा होते ही चाँद की सफ़ेद  रौशनी में मकबरे की ख़ूबसूरती बढ़ जाती है. 42 मीटर की ऊँचाई के साथ यह पूरे फैजाबाद शहर और उसके आसपास का दृश्य प्रस्तुत करता है . इमारत की देखरेख भारतीय पुरातत्व विभाग करता है.

बनी खानम का मकबरा :

बनी खानम का मकबरा नवाबी काल का एक महत्वपूर्ण स्मारक है. बनी खानम नवाब नज़म- उद- दौला की पत्नी थीं. यह मकबरा बनी खानम के गुलाम अल्मास अली खां ने बनवाया था. इस इमारत का निर्माण 18 वीं सदी के उत्तरार्ध में किया गया. इस मकबरे का भूतल आयताकार है जिस पर निर्मित वर्गाकार कक्ष के मध्य में कब्र स्थित है. गुम्बद पूर्णतया गुलाब बाड़ी शैली में बना है. इसके निर्माण में लखौरी ईंटो और गचकारी का प्रयोग किया गया है परन्तु फर्श का निर्माण पत्थरों से किया गया है.

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