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श्री अयोध्या जी के बारे में

अजोध्या के राम, राम जू की अजोध्या …! त्रेता, द्वापर और अब कलयुग…लाखों वर्ष बाद, आज भी राम अचल हैं अविनाशी हैं. जब तक राम हैं तभी तक अयोध्या का महत्व रहेगा और जब तक अयोध्या रहेगी तब तक प्रभु श्री राम करोड़ों हृदयों में वास करते रहेंगे . लाखों वर्ष से मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम पाप पुण्य की कसौटी पर अपने भक्तों पर कृपा बरसाते रहे हैं. उनके कृपा पात्र भक्त, साधो, सन्यासी उनके दर्शन को सदैव लालायित रहते हैं. उनकी राम के प्रति भक्ति, प्रेम और उन्हें महसूस करने की लालसा दूरी नहीं देखती. इस पावन धरती पर पहुँचने का संघर्ष नहीं देखती, समय नहीं देखती. वो दीन दुनिया भूल के अपने राम के सानिध्य में कुछ समय बिताने के लिए यहाँ आते हैं. वो उन पवित्र स्थानों पर बने मंदिरों में राम को, उसी रूप में देखते हैं. जिस रूप में कभी राम ने जन्म लिया होगा, कहीं सखाओं के साथ खेले होंगे, कहीं विवाहोपरांत सीता माता के साथ पहले कदम रखें होंगे, कहीं लंका विजय के बाद अपनी प्रजा के साथ उत्सव मनाया होगा. कभी लोक कल्याणी प्रभु श्री राम के कदमों से धन्य हुयी अयोध्या मोक्ष दायनी सरयू नदी के आचमन से जिवंत रहती है. अथर्व वेद में इसे देवों द्वारा निर्मित स्वर्ग नगरी कहा गया है.
                  वेदों, पुराणों और ग्रंथों में अयोध्या की व्युत्पत्ति के प्रमाण मिलते हैं और इसके महात्म्य के व्याख्यान मिलते हैं. कालांतर में अयोध्या को कोसल, साकेत, आयुत, विनीता, अवध आदि कई नामों से जाना गया. अयोध्या का अर्थ है “जिसको युद्ध में पराजित न किया जा सके”. हजारों वर्षों तक इस नगरी पर सूर्य वंशी राजाओं ने राज किया. उसके बाद अयोध्या में जैन, बुद्ध, शैव, वैष्णव और इस्लाम ने भी इस धरती के आलोक में अपने धर्मों का प्रचार प्रसार किया. अयोध्या हमेशा सभी धर्मों के लिए पवित्र रही. यह धरती कई बार उजड़ी, फिर प्रभु राम पर आस्था रखने वाले किसी भक्त ने इस नगरी का बारम्बार जीर्णोद्धार किया. ऐसा माना जाता है कि अयोध्या को उज्जैन के सूर्यवंशी राजा चन्द्र गुप्त विक्रमादित्य द्वारा पुनः स्थापित किया गया था. आज भी यहाँ के प्राचीन मन्दिरों में विक्रम संवत काल के चिन्ह मिलते हैं. अधिकतर मंदिर के भवनों के शिल्प में राजा विक्रमादित्य की 32 पुतलियों की आकृतियाँ अंकित हैं. इस पवित्र स्थान पर देश के कोने कोने से श्रद्धालु आते हैं. यहाँ हिन्दू धर्म के मानने वालों समेत मुस्लिम, जैन, बौध, सिख धर्मों के मानने वाले धर्म गुरुओं/प्रचारकों ने इस धरती को मान दिया है. अयोध्या आज भी उतनी ही प्रभु श्री राम की है, जितनी किसी युग में.

सर्वधर्म नगरी

अयोध्या हिन्दू धर्म के आस्था का केंद्र है . अयोध्या को प्रभु श्री राम की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्धि मिली. पर यह धरती कई धर्मों के लिए महत्पूर्ण रही है. इस धरती पर सिख, बौध, जैन, सूफ़ी धर्म गुरुओं ने अपनी अपनी तरीके से अध्यात्म का यश फैलाने पर काम किया है. जिसकी खुशबू यहाँ के सौहार्दपूर्ण  वातावरण में महसूस होती है.  अयोध्या में भगवा ध्वजमालाएंप्रसाद बनाने वाले आधे से अधिक कारीगर मुसलमान हैं।

सूफ़ी

आज भी अयोध्या में सूफी संतों और फकीरों की 80 से अधिक मजारें और दरगाहें हैं और मध्यकाल से ही अयोध्या को आसपास जिलों के मुस्लिम घरों में मक्का खुर्द (छोटी मक्का) कहा जाता है।

जैन              

अयोध्या जैन तीर्थंकरों  की भी जन्मस्थली रही है। चौबीस र्तीथकरों में से पांच तीर्थंकर ने इस धरती पर जन्म लेकर इस धरती को जैन समुदाय के लिए पवित्र बना दिया । अयोध्या का जो नामकरण साकेत से अयोध्या (वह क्षेत्र जहां युद्ध और वध नहीं होते) हुआउस पर बौद्ध धर्म के साथ जैन धर्म की अहिंसा का भी प्रभाव माना गया है।

सिख             

   सिख गुरुओं में नानकतेगबहादुर और गुरु गोविंद सिंह ने अयोध्या के ब्रह्मकुण्ड में ध्यान साधना की थी। सरयू तट पर स्थित ब्रम्हकुण्ड  सिखों में ब्रम्ह कुण्ड साहिब के नाम से भी जाना जाता है. यहाँ स्थित  गुरुद्वारा सिख धर्म के सबसे पुराने गुरुद्वारों में से एक है।  

दक्षिण कोरिया का कारक वंश

यहाँ से हजारों किलोमीटर दूर  दक्षिण कोरिया के लिए भी यह स्थान उतना ही महत्वपूर्ण है जितना हम भारतियों के लिए . कोरिया की पुरातन इतिहास गाथा के अनुसार प्राचीन कोरियाई कारक राज्य के संस्थापक राजा सूरो की धर्मपत्नी रानी हो का जन्म अयोध्या नगर में हुआ था.  कोरिया में कारक गोत्र के तक़रीबन साठ लाख लोग ख़ुद को राजा सुरो और अयोध्या की राजकुमारी के वंश का बताते हैं. अयोध्या नगरी दक्षिण कोरिया के कारक वंश के लिए पूज्य है.  राज वंश का प्रतिनिधि मण्डल यहाँ अपने विधि विधान से श्रद्धांजलि देने आता है. उस स्थान को पवित्र मानते हैं.

  अयोध्या का संक्षिप्त इतिहास

अयोध्या उत्तर प्रदेश राज्य के जनपद फैज़ाबाद का एक अत्यंत प्राचीन नगर है. हिन्दू धर्म ग्रन्थ रामायण एवं मनु में अयोध्या की स्थापना का पता मिलता है. कालांतर में अयोध्या को कई नाम से जाना गया. जिनमे प्रमुख रूप से साकेत, आयुत, विनीता एवं अवध हैं. अयोध्या का शाब्दिक अर्थ है “जिसको युद्ध में पराजित न किया जा सके” .हिन्दू मान्यता के अनुसार हजारों वर्षों तक इस नगरी पर सूर्य वंशी राजाओं ने राज किया. उसके बाद लगभग 2 हज़ार वर्ष से इस भू भाग पर जैन, बुद्ध, शैव, वैष्णव एवं इस्लाम ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई. पर अयोध्या हमेशा सभी धर्मों के लिए पवित्र रही. यहाँ हिन्दू समेत मुस्लिम, जैन, बुद्ध, सिख धर्मों के मानने वाले धर्म गुरुओं/प्रचारकों ने इस धर्म नगरी को अपना आशीष दिया है. अयोध्या का इतिहास महाजनपद के अस्तित्व में आने से भी जोड़ा जाता है. तथागत भगवान गौतम बुद्ध ने कई बार इस नगरी में भ्रमण किया. मौर्य काल के दौरान यह क्षेत्र महत्वपूर्ण सामाजिक एवं धार्मिक केंद्र रहा. अयोध्या का जिक्र हमारे वेदों पुराणों भी है, परन्तु ऐसा माना जाता है कि अयोध्या को उज्जैन के सूर्यवंशी राजा चन्द्र गुप्त विक्रमादित्य द्वारा पुनः स्थापित किया गया था. चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने पाटली पुत्र के बाद इस क्षेत्र को महत्वपूर्ण शहर के रूप में हमेशा देखा. पसर धीरे धीरे इसका सौंदर्य जाता रहा. सल्तनत और मुग़ल शासन के दौरान भी इस क्षेत्र को नज़रंदाज़ किया गया. लेकिन सत्रहवी शताब्दी में शुजाउद्दौला ने फैजाबाद को फिर से राजधानी बना दी. अंग्रेजों ने यहाँ रेल की पटरियां बिछायीं, व अन्य सुख सुविधाओं के इंतजाम किये. हिन्दू राजाओं ने यहाँ बड़ी संख्या में मंदिरों का निर्माण करवाया.

ऐसी पवित्र नगरी के दर्शन मात्र से जीवन धन्य होता है. आप भी आईये मोक्ष नगरी अयोध्या में. यहाँ देश के किसी भी सड़क मार्ग से किसी भी साधन से पहुंचा जा सकता है. रेल मार्ग से भी देश के विभिन्न हिस्सों से अयोध्या का जुड़ाव है. अयोध्या पहुँचने के लिए निकटवर्ती शहरों लखनऊ, वाराणसी, इलाहाबाद, गोरखपुर, कानपुर के हवाई अड्डों तक हवाई मार्ग से आया जा सकता है. जहाँ से हर समय सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है.

वायु मार्ग –
अयोध्या का निकटतम एयरपोर्ट लखनऊ में है जो लगभग 140 किलोमीटर की दूरी पर है। यह एयरपोर्ट देश के प्रमुख शहरों से विभिन्न फ्लाइटों के माध्यम से जुड़ा है।

रेल मार्ग-
अयोध्या, लखनऊ मुगलसराय रेलवे प्रखंड का एक स्टेशन है। फैजाबाद अयोध्या का निकटतम मुख्य रेलवे स्टेशन है। यह रेलवे स्टेशन मुगल सराय-लखनऊ लाइन पर स्थित है। उत्तर प्रदेश और देश के लगभग तमाम शहरों से यहां पहुंचा जा सकता है। यहाँ से बस्ती, बनारस एवं रामेश्वरम के लिए भी सीधी ट्रेन है

सड़क मार्ग-
उत्तर प्रदेश सड़क परिवहन निगम की बसें लगभग सभी प्रमुख शहरों से अयोध्या के लिए चलती हैं। राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग से अयोध्या जुड़ा हुआ है।

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